Saturday, 11 January 2020
आजाद परिंदे कहते है
आओ नया गुलिस्तां तैयार करें
अंहद मे नाद
आप ही करणी
Tuesday, 29 October 2019
क्या दाद दे,...
क्या दाद दे,..
दुनिया बनाने वाले की,..
दर्द है तो दवा हैं
दवा काम न करें
तो दुआ हैं
ये हैं तब तमाशा,..
जब सब मे
ख़ुद छुपा हैं,...
कही छपा हैं
कही छुपा हैं
अजीबोगरीब सब,..
क्या उससे छुपा है
कहा तमाशबीनो
का खेल,..
बस फ़क़ीरी में
वो फ़क़ीर हुआ है
वही हँसी हैं
वही गमगीन,..
वो
अज़ब पहेली बना
ख़ुद ही तमाशबीन
मैं न बदला
मैं न बदला
हज़ार कोशिशों के बाद...
मैं इंसान होता
तो बदलता,..
तेरे विचारों से उतपन्न
मै भाव हूं
मैं कहा मरा,.
करता स्थान परिवर्तन,..
आत्मा मरकर
देह बदले
मैं बदलता
विचार परिवर्तन,..
मैं नही अकेला,..
सब मेरे साथी
सहजता से
मुझ बिन किसी को
नींद न आती
मैं हर जीव का साथी
मैं मरता
तो दुनिया ही
स्वर्ग न हों जाती ?
०
Tuesday, 27 August 2019
दायरा रख जरूरी हैं
दायरा रख ज़रूरी हैं,..
यू बेहिसाब
दुनिया चलती नही,..
न नफ़रत का मंजर बना,..
फ़रेब से इस जहांन मे
किसी की दाल गलती नही,..
झूठ का सूरज चमकता
कहा बरसो के लिये,
बिन विश्वास के
राह बन ती नही,..
बदलना हैं तो साहब
खुद को बदल,
बिना तेरे तपै दुनिया
चलती नही
माना कि हम
खासो ऐ आम नही,..
पर बिन कचरे के
भी क़ायनात पलती नही,..
बैकार यहाँ दोस्त
कुछ भी नही,..
बिन ताप के
धरती चलती नही