Saturday, 11 January 2020

अंहद मे नाद

अंहद में नाद 
नाद से अंहद
मुर्गी से अंडा
जू अंडे से मुर्गी,.
अंहद बिच ब्रह्मांड,..
फिरे जु अनजान,.
भीतर भीड़
फिर भी नादान
अण्डकोष से आरम्भ,
ब्रह्मरंध्र में आराम...
मौन से नाड सुने
नाद हो गुंजायमान
उसकी अंग तरंगी 
फिर भी हैं अनजान....
न भीतर न बाहर
वो छलावा सा बादल
अंहद को हद करता
हद को पार न दरता
पागल में मुस्काता
यू न पार हम पाता
जो कहै मिल गया
उसे दे भटकता......
अंहद सफर 
न कोई गाड़ी
बन मौन ही ले जाता
मौन मन रँगा
बजा डंका
अंहद उतर......

आप ही करणी

आप ही करणी
आप ही भरणी
आप मे 
आप ही समाया
सब जानत
दूध मे घी
घी घर्षण से आया........
सूरज तपता
पर न जलता
बाप को बाप बताया
लटू सी हरिहर
घूमे धरती 
किसी को 
न गिरते पाया..........
हिम् पिघले
बनता पानी
पानी हिम् बनाया
मुर्गी से अंडा
अंड से मुर्गी
अहम जन्म हैं पाया........
मैं ही करता
मैं ही भरता
वहम तुझे 
नजर न वो आया
मर्ग कस्तूरी
माया पुरी
कोई पकड़ न पाया........
चोरी करता 
उपवन भँवरा
क्या आपने कुछ
काम हैं आया
हाथ हथेली
दोनों खाली
मर कर तू पछतायो.......
रोज सवेरे
गुण गुण करता,
पर तु न सुन पायो
अंत काल 
सब छोड़ो
पर तु न गुण पायो.......
आंख खुली तै
देख अंधेरी
क्यो जी मच लायो
हंस उड़ गया
पंख पसारे
काम नही 
कुछ आयो........
मैं मैं तेरी
यही धरि हैं
संग सांस भी
न जा पायो
आप ही करणी
आप ही भरनी.........

Tuesday, 29 October 2019

क्या दाद दे,...

क्या दाद दे,..
दुनिया बनाने वाले की,..
दर्द है तो दवा हैं
दवा काम न करें
तो दुआ हैं
ये हैं तब तमाशा,..
जब सब मे
ख़ुद छुपा हैं,...
कही छपा हैं
कही छुपा हैं
अजीबोगरीब सब,..
क्या उससे छुपा है
कहा तमाशबीनो
का खेल,..
बस फ़क़ीरी में
वो फ़क़ीर हुआ है
वही हँसी हैं
वही गमगीन,..
वो

अज़ब पहेली बना

ख़ुद ही तमाशबीन

मैं न बदला

मैं न बदला
हज़ार कोशिशों के बाद...
मैं इंसान होता
तो बदलता,..
तेरे विचारों से उतपन्न
मै भाव हूं
मैं कहा मरा,.
करता स्थान परिवर्तन,..
आत्मा मरकर
देह बदले
मैं बदलता
विचार परिवर्तन,..
मैं नही अकेला,..
सब मेरे साथी
सहजता से
मुझ बिन किसी को
नींद न आती
मैं हर जीव का साथी
मैं मरता
तो दुनिया ही
स्वर्ग न हों जाती ?

Tuesday, 27 August 2019

दायरा रख जरूरी हैं

दायरा रख ज़रूरी हैं,..
यू बेहिसाब
दुनिया चलती नही,..
न नफ़रत का मंजर बना,..
फ़रेब से इस जहांन मे
किसी की दाल गलती नही,..
झूठ का सूरज चमकता
कहा बरसो के लिये,
बिन विश्वास के
राह बन ती नही,..
बदलना हैं  तो साहब
खुद को बदल,
बिना तेरे तपै दुनिया
चलती नही
माना कि हम
खासो ऐ आम नही,..
पर बिन कचरे के
भी क़ायनात पलती नही,..
बैकार यहाँ दोस्त
कुछ भी नही,..
बिन ताप के
धरती चलती नही

Sunday, 5 May 2019

समाज आज

ख्वाबो मे न खो
टूट जायेंगे,
जो अपने हैं ख़ास
रूठ जायेगे,
यही तो जिंदगी हैं साहब,
गैरों से क्या डरना,
मौका मिला तो अपने
ही लूट जायेंगे,
बाड़ ही कमजोर हो तो,
फ़सल नाश होती हैं
जो बनाते हैं कम्बल,
सर्द उनकी ही राते होती हैं
माँ को खबर ही नही
बच्चे बड़े हो गये,
पड़ी अनाथ आश्रम मे
वो चुपके चुपके रोती हैं

Thursday, 11 September 2014

गुरू शक्ति बडी गुरू तेज महान



1. गुरू शक्ति बडी गुरू तेज महान
गुरू बिन काहू मिले नही ग्यान।
गुरू रखवारो दे साथ हमारो 
कटे भव फन्द खिले मुस्कान।
दया निधि बिन्दु कृपा के है सिन्धु
उबारेगे संकट सें मोरे प्रान।
सब छोड के आस पडो तेरे पास
करें कर जोर कै जोर प्रणाम।



भले कर्ण जैसी नही मुझमें शक्ति
भले पांडवों सी नही मुझमें भक्ति
मुझे एकलव्य सा नही ग्यान है
गुरू की कृपा की न पहिचान है
पतित अग्य हूँ भ्रष्ट हूँ बेसहारा
दीजिए ना गुरू आप अपना सहारा
नमन है तेरी आज रज धूल को
खिला दे मेरे भी चमन फूल को
सिर झूका तेरे चरणो, दुवा दीजिए
गुरू कृपा की नजर एक इधर कीजिए